महात्मा गाँधी के व्यापक प्रभाव से सिनेमा जगत भी अछूता नहीं रहा. गाँधी जी के सामाजिक दायित्वों, आदर्शो एवं मूल्यों से प्रेरित बहुत सारी फिल्मे भारत में कई भाषाओ में एवं भारत के बाहर भी बनाई गयी है. कुछ फिल्मो ने महात्मा गाँधी को एक किरदार की तरह दिखाया तो कुछ में वो अपने सिद्धांतों के रूप में रहें.

1. Gandhi

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गाँधी पर अकादमी फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्म थी गाँधी.बेन किंग्सले (जो की बहुत हद तक गाँधी से दिखते थे) ने गाँधी की भूमिका निभाई थी. सन १९८२ में यह फिल्म प्रदर्शित की गयी थी.

2. Lage raho Munna Bhai

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लगे रहो मुन्ना भाई नेगाँधी जी केसिद्धांतों को यह मनोरंजक मगर संवेदनशील तरीके से दिखाया और “गांधीगिरी” को घर घर तक पहुचाया.

3. Making Of Mahatma

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मेकिंग ऑफ़ महात्मा (१९९६) में प्रदर्शित की गयी थी. राष्ट्र पिता की भूमिका रजत कपूर ने निभाई थी. इस में गाँधी जी के अफ्रीका में किये गए संघर्ष की कहानी है.

4. Hey Ram

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हे राम (२०००)-कमल हसन द्वारा निर्मित इस फिल्म में हासन नाथूराम गोडसे के सामानांतर किरदार में है लेकिन फिल्म के अंतिम दृश्य में ह्रदय परिवर्तन के कारण वह नाथूराम गोडसे से अलग हो जाते है. इस फिल्म में गाँधी जी के किरदार में नसीरुद्दीन शाह ने अभिनय किया है.

5. Maine Gandhi ko nahi Mara

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मैंने गाँधी को नहीं मारा (२००५)- एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो हिंदी का सेवानिवृत्त शिक्षक जिसे अल्ज़ईमार्स नाम की बिमारी हो जाती है और उसे लगता है की उसने गांधी को मारा है. वास्तव में यह फिल्म गाँधी नहीं अपितु आज के सामाजिक परिदृश्य में गाँधी के मूल्यों को मरने की बात करती है.

6. Gandhi-My Father

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गाँधी माय फादर- ये कहानी है महात्मा गाँधी और उनके पुत्र,हरिलाल,के बीच के मतभेदों की. इस में गाँधी का किरदार दर्शन जरीवाला ने निभाया है और हरिलाल की भूमिका में अक्षय खन्ना हैं.

7. Mahatma

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महात्मा (तेलगु २००९) फिल्म में मुख्य किरदार, शहर के असामाजिक तत्वों से लड़ने के लिये, गाँधी जी के मूल्यों और आदर्शो पर एक “महात्मा पार्टी” बनाता है.

8. Road to Sangam

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रोड टू संगम- हसरत मुल्ला(परेश रावल),एक मोटर मैकेनिक है, को एक पुरानी फोर्ड इंजन ठीक करने का काम दिया जाता है. लेकिन जब पता चलता है की यही वह कार है जिसमे गाँधी जी की अस्थियाँ ले जायी गयी थी तो हसरत मुल्ला, मुश्लिम होने के कारण सामाजिक और मानसिक गतिरोध में फ़स जाता है. फिल्म में दिखाया गया है की कैसे हसरत मुल्ला उन गतिरोधो को गाँधी जी के आदर्शो की सहायता से खत्म करता है.

9. Nine Hours To Ram

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नाइन आवर टू राम (१९६३ ब्रिटिश फिल्म)- ये फिल्म नाथूराम की जिंदगी के ९ घंटे के बारे में है जिसके वो गाँधी जी को मरने की योजना बनाता है. इस दौरान फिल्म फ्लैश बैक में नाथूराम के जीवन में हुए मुश्लिम हिंसा और दो युवतियों से उसके संबंध के बारे में भी बताया गया है.