देश में दो ऐसे सनी है जो अपनी बोडी के लिए प्रसिद्द है. सनी देओल और सनी लिओन. बस उपयोग की भिन्नता है. किन्तु लक्ष्य एक ही है. सामने वाले को मूर्छित करना. लेकिन जहाँ सनी देओल का ढाई किलो का हाथ अब सिर्फ एक किलो का रह गया है, वहीँ सनी लिओन की लोकप्रियता का भार मिडिया ने उठा लिया है. इसमें कोई शक नहीं की आज सन्नी लिओन को बहुत से लोग जानते है,  सिर्फ मानव ही नहीं मशीन भी इन्हें ‘उस’ तरह ही पहचानती है. यकीं ना आये तो आप गूगल में “sanny leon in saari” टाइप करिए aur aapko result milega- “hot sunny leon without saari”.

इस बार के साक्षात्कार एपिसोड में  आईये उनसे आपकी मुलाकात करवाते है और जानते है कुछ और ‘अन्दर’ की बाते.
सनी लिओन जी! आपका बहुत बहुत स्वागत है हमारे स्टूडियो में!
ohh C’mon!! i like studios!!!
जी जी!! वो तो है….अच्छा सनी, आपको भारत आकर कैसा लग रहा है?
बहोत खुला खुला लग रहा है.
बिलकुल जैसे आपके कपड़ो के बारे में लोगो को लगता है. लोग कह रहे है की आप कुछ ज्यादे ही कपडे उतार रही है.
देखिये, भारत मेरा घर है. और मै घर में कपडे नहीं उतारूंगी तो क्या बाहर उतारूंगी?
नहीं नहीं उस तरह नहीं…
listen!! मुझे किस तरह कपडे उतारने है और किस तरह नहीं उतारने है,  आपको बताने की जरुरत नहीं है. ये महेश भट्ट जी को अच्छी तरह पता है.
बहुत अच्छी बात कही आपने. अच्छा ये बताईये की आप भारत क्यों आई??इतने साल बाद घर की कैसे याद आ गयी?
कई वजह है इसके पीछे…विदेशी मुझे नैसर्गिक रूप में देख कर उब चुके थे…..
नैसर्गिक मतलब बिना कपड़ो के?
What rubbish!!! देखिये मै आपकी तरह जाहिल नहीं हो सकती…मै इस तरह से बात नहीं कर सकती …..मेरे कुछ संस्कार है.
माफ़ करियेगा, औरो की तरह आपको देख मै अपने संस्कार भूल गया था…मै बहुत शर्मिंदा हूँ.
Its ok….आपको शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं…अगर सभी लोग ऐसे ही शर्मिंदा होने लगे तो मुझे unemployement हो जायेगा.
ओके…मै फिर से बेशरम हो जाता हूँ….आप जारी रखिये…
हां तो मै कह रही थी की मेरे एक ही स्वरुप को बार बार देख लोग उब चुके थे वहां मेरे लिए बहुत मुश्किल था बार-बार नैसर्गिक होकर अलग दिखना…इसलिए इससे पहले की वो लोग मुझे बदलते, मैंने पुरे के पुरे दर्शक ही बदल दिए. और यहाँ अपने घर चली आई.
ओह्ह…
एक और वजह थी…वहां का बाज़ार भी छोटा है. वहां घर के बेडरूम तक सिमट के रह जाना पड़ता था. मुझे कैद की जिंदगी पसंद नहीं…मुझे बेडरूम की चारदीवारी में रहना कत्तई पसंद नहीं था…इसलिए मैंने फैसला किया की अब मै घर वापस जाउंगी…मेरी आजादी के लिए मेरे घरवाले ही लड़ सकते है…
वो कैसे?
वो ऐसे… वहा की मीडिया अभी develop नहीं हुई है. वहा के न्यूज चैनल अभी भी न्यूज ही दिखाते.[ये कहकर लिओन जी जोर का ठहाका लगाती है]..कहने को तो लीब्रल है लेकिन देखिये कितने कंजर्वेटिव है.
लेकिन न्यूज चैनल को तो न्यूज ही दिखाना चाहिए…
Dont be silly!! ohh my goss!!! यही तो कंजर्वेटिव होना है…आज भी आप पुराने खयालातो में जी रहे है…आज से २० साल पहले भी न्यूज चैनल, न्यूज दिखाते थे…आज भी न्यूज दिखाते है….कोई development ही नहीं हुआ.
तो आपके कहने का मतलब है भारत में मीडिया ने ग्रोथ किया है.
बिलकुल. यहाँ की मीडिया ने मुझे बिलकुल ताजमहल जैसे अजूबे की तरह लिया और मेनन्यूज बनाकर मुझे बेडरूम की दम्घुताऊ जिंदगी से बाहर निकाल ड्राइंग रूम के पारिवारिक माहौल तक पहुचाया. अब बच्चे भी मुझसे मिल सकते है.अब आपको मुझे देखने के लिए गन्दी साइट्स पर नहीं जाना होगा. बस कुछ न्यूज पोर्टल्स क्लीक करके आप मुझे महसूस कर सकते है. अभिव्यक्ति की आजादी क्या होती है इसके असली फॉर्म को मैंने पहचाना!
 और क्या है वो?
जैसे मै कुछ कहना चाहती हूँ, वैसे ही मेरी बॉडी भी कुछ कहना चाहती है…अब आप ही बताईये…अगर आप बोलना चाहते है और आपके मुह पे कोई कपडा रख दे तो आपको कैसा महसूस करेंगे??
जी दम घुटने लगेगा….
बिलकुल! मेरा भी दम घुटने लगा था….मैंने कपडे उतार के फेक दिए.
बहुत बढ़िया किया आपने….मतलब भारत आने का अनुभव अच्छा रहा आपके लिए??
[चेहरे पे मुस्कराहट के साथ] मत पूछिये. घर आने की कैसी ख़ुशी होती है ये मैंने भारत आकर जाना. जैसे एक परिवार मिला हो मुझे. भट्ट जी तो जैसे पिता की तरह है. उन्हें पता है की मेरे अन्दर क्या है और कैसे निकालना है…
प्रतिभा??
हां बिलकुल! और मीडिया!! ohh gosh!! मीडिया तो जैसे बॉयफ्रेंड्स हो. मुझे सर पे बिठा कर रखते है. बहोत ख्याल रखते है…..मैंने खाया की नहीं, पिया की नहीं,पिया तो कौन सा ब्रांड, सोयी की नहीं ….बहोत possesive है मुझे लेकर…इतने insecure है की बाथरूम तक अकेला नहीं छोड़ते.
और जनता ??उसके बारे में क्या कहना चाहेंगी? 
जनता का क्या है. मीडिया है न! 😉
भारत में ऐसे कई लोग है जो आपका इस तरह से होना पसंद नहीं करते. उनका कहना है की आपके पीछे शक्ति कपूर को छोड़ देना चाहिए!
देखिये मै अपने फैन्स के लिए जीती हूँ.  मै उनकी बिलकुल  परवाह नहीं करती जो मुझे पसंद नहीं करते…देखा जाए तो ऐसा कोई नहीं है जिससे कुछ लोग नफरत न करे, क्राइस्ट से भी कुछ लोग नफरत करते थे…उनकी तरह मै भी यही कहना चाहूंगी की.” हे इश्वर, उन्हें माफ़ करना!! वो नहीं जानते की वो क्या मिस कर रहे है!”
भगवान् करे की इश्वर आपकी सुन ले!! …आगे बढ़ते है…यहाँ किसी से डर भी लगता है आपको?
हां..यहाँ कुछ ऐसी लडकिया है जो मुझे टक्कर देने की कोशिश करती रहती है. उनकी पैकेजिंग पुष्पक फिल्म के गिफ्ट पैक की तरह है. ऊपर से तो देखने में अच्छा लगता है लेकिन अन्दर क्या है ये तो पता चल ही गया है आपको..मुझसे कम्पिटीसन करके वो गलती कर रही है!

लेकिन कैसे? उनके पास भी मीडिया है, जनता है, IPL है, डिमांड है, आपके पास क्या है?
मेरे पास महेश भट्ट है!
तो? उससे क्या होगा?
उससे ये होगा की body-२…
….आपका मतलब जिस्म-२ 
yes!.body-2 release hogi, supar hit hogi, इधर क्रिटिक पे पे करते रह जायेंगे और उधर फिल्म बॉक्स आफिस पर धमाल मचा देगी. और वर्ष की सबसे सफल पारिवारिक फिल्म के रूप में जानी जाएगी, मुझे बॉडी-२ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा… और भट्ट जी बॉडी-३ की घोषणा करेंगे….फिर मीडिया की तरह निर्देशक भी मेरे बॉय फ्रेंड्स बन जायेंगे. महेश जी के साथ अपनी बॉडी-१० करने के बाद मै संन्यास ले लुंगी और चुनाव लडूंगी….जीत गयी तो लोक सभा नहीं तो राज्य सभा की मेंबर बन जाउंगी.
उसके बाद?
उसके बाद किसी भी राजनेता को पोर्न देखने के लिए को मोबाइल जैसे अर्तिफ़िसिअल चीज़ का सहारा नहीं लेना पड़ेगा.
ओह्ह..काफी दूर तक सोच के रखा है आपके
नहीं नही…ये सोंचा नहीं है…ये तो वो चीज़े है जो होना है. देखिये जब मै भारत आई तो मैंने पहली चीज़ यही सीखी…”की सोचना मना है” बस करना है…करते रहना है…न सोचना है, न सुनना है…सब तो यही करते है!!
बिलकुल! सनी जी आप स्टूडियो में आयी इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!
muaaah!!
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